सुदामा और श्री कृष्ण की अटूट मित्रता
सुदामा और श्री कृष्ण की मित्रता आज भी अमर है। जब सुदामा अपने बचपन के मित्र कृष्ण से मिलने द्वारका गए, तो वे बेहद गरीबी में थे। उनके सिर पर पगड़ी नहीं थी, शरीर पर कोई ठीक-ठाक वस्त्र नहीं था। कुर्ता तो उनके पास था ही नहीं, और धोती इतनी फटी हुई थी कि उसे देखकर हृदय द्रवित हो उठता। पैरों में जूते का नामोनिशान नहीं था।
फिर भी, इतनी दयनीय अवस्था में होते हुए भी सुदामा का मनोबल नहीं टूटा। वे कृष्ण से मिलने गए न पैसे के लिए, न वस्त्रों के लिए, बल्कि मित्रता के लिए। यही तो बात है। कृष्ण के लिए सुदामा की दशा नहीं, बल्कि उनका हृदय मायने रखता था।
जब श्री कृỔष्ण ने उन्हें इस अवस्था में देखा, तो उनकी आँखें नम हो उठीं। बिना किसी प्रश्न के, बिना किसी तुलना के, उन्होंने सुदामा का स्वागत किया — नंगे पैरों के बावजूद, फटे कपड़ों के बावजूद। कृष्ण ने न सिर्फ उनकी गरीबी दूर की, बल्कि उनके जीवन को सम्मान और समृद्धि स
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