मोर के पंख की लीला: श्री कृष्ण और राधा का प्रेम

भगवान श्री कृष्ण को अक्सर मोर के पंख से सजे हुए देखा जाता है। इस पंख का सिर्फ सौंदर्य नहीं, बल्कि एक गहरा भावनात्मक अर्थ भी है। कहा जाता है कि एक दिन वृंदावन में राधा श्री कृष्ण की बांसुरी के स्वर पर नाच रही थीं। उस समय आसपास के मोर भी उनके संगीत पर मंत्रमुग्ध होकर नृत्य करने लगे।

इसी नृत्य के दौरान एक मोर का पंख धरती पर गिर गया। श्री कृष्ण ने उसे उठाया और अपने माथे पर सजा लिया। लेकिन यह सजावट नहीं, एक अनमोल भावना थी। उन्होंने मोर के पंख को राधा के प्रेम का प्रतीक मान लिया। उनके लिए यह पंख सिर्फ एक आभूषण नहीं, बल्कि उस अटूट प्रेम की यादगार था, जो राधा ने उनके प्रति दिखाया।

वृंदावन की घटनाओं में यह पल विशेष है। मोर का पंख न केवल प्रकृति की सुंदरता है, बल्कि यह कृष्ण और राधा के आध्यात्मिक प्रेम का भी प्रतीक बन गया। आज भी जब कोई श्री कृष्ण की मूर्ति में यह पंख देखता है, तो उनके प्रेम क

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