कृष्ण का रंग क्या है – काला या नीला?

कृष्ण नाम की व्युत्पत्ति संस्कृत शब्द 'कृष्ण' से हुई है, जिसका अर्थ है – काला या गहरा। इसलिए प्राचीन ग्रंथों और वेदों में भगवान कृष्ण को अक्सर गहरे रंग के द्रविड़ देवता के रूप में वर्णित किया गया है। इतना ही नहीं, ओडिशा की पारंपरिक पट्टा चित्रकला में भी उन्हें और विष्णु को सदैव काली त्वचा वाले दिखाया जाता है।

फिर भी, आजकल हम अक्सर कृष्ण को नीले या नीलगुन्दम रंग में चित्रित देखते हैं। क्या वाकई उनकी त्वचा नीली थी? वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसकी कोई व्याख्या नहीं मिलती, लेकिन कला, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा में नीला रंग दैवीयता, अनंतता और आकर्षण का प्रतीक माना जाता है।

कुछ लोग मानते हैं कि 'कृष्ण' का अर्थ सिर्फ रंग नहीं, बल्कि 'सभी को आकर्षित करने वाला' भी है। इस तरह, उनका रंग न केवल त्वचा का वर्ण दर्शाता है, बल्कि उनकी आकर्षक प्रकृति का भी संकेत देता है।

समय के साथ कला और प्रतीकवाद

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय