अगर मैं एक दिन के लिए अदृश्य होता
कल्पना कीजिए, आप अचानक एक दिन के लिए पूरी तरह अदृश्य हो जाएँ। क्या आप चुपचाप किसी के पीछे-पीछे घूमते? या फिर कोई शरारत करते? लेकिन अगर मुझे ऐसा अवसर मिले, तो मैं इसे किसी आम इंसान की तरह नहीं बल्कि एक सेवा के रूप में इस्तेमाल करता।
मैं उन जगहों पर जाता जहाँ आमतौर पर लोगों की नज़र नहीं पहुँचती — झुग्गियों में, अनाथालयों में, या फिर उन स्कूलों में जहाँ बच्चे पढ़ने को तरसते हैं। मैं हर बच्चे के लिए किताबें, स्कूल बैग और सुरक्षित भोजन की व्यवस्था करता, चाहे वह कितना भी दूर क्यों न हो। मैं बुजुर्गों के घरों में जाकर उनकी देखभाल करता, जिन्हें आज भूलाया जा रहा है।
कहीं कोई बच्चा रोता हुआ दिखे, कहीं कोई बूढ़ी दादी अकेले बैठी हो, तो मैं बिना किसी को दिखे उनके दर्द को छूता। अदृश्य होने का मतलब ज़िम्मेदारी से भागना नहीं, बल्कि बिना दिखे अच्छाई फैलाना।
एक दिन काफी है म
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