पूतना का विशालकाय शरीर
पूतना, जो एक राक्षसी थी, उसका शरीर इतना विशाल था कि जब वह मरकर गिरी, तो उसके शरीर ने छह कोस के भीतर के सभी वृक्षों को कुचल दिया। यह दृश्य इतना भयानक था कि उसे देखकर सभी के रोंगटे खड़े हो गए।
उसका विरूप रूप सचमुच डरावना था। उसका मुँह हल के समान चौड़ा था और तीखी, भयंकर दाढ़ें उसे और भी भयानक बना देती थीं। नथुने इतने गहरे थे मानो पहाड़ की गुफ़ा में घुस जाएं। उसके स्तन पहाड़ से गिरी चट्टानों की तरह विशाल थे, जो उसकी भयानक छवि में और भी विकरालता भर देते थे।
भक्तिकालीन ग्रंथों में इस घटना को अत्यंत प्रभावशाली तरीके से चित्रित किया गया है। शिशु कृष्ण ने उसके विषैले स्तनपान के बावजूद उसे अपने हाथों से मार दिया था, जो उनकी दिव्य शक्ति का प्रमाण है।
पूतना की मृत्यु के बाद उसके विशालकाय शरीर का भू-पर गिरना, जिसने छह कोस के जंगल को नष्ट कर दिया, एक ऐसी घटना है जो सदियों से लोगों के बीच मुखर
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