भारत में राष्ट्रवाद की शुरुआत
भारत में राष्ट्रवाद की भावना का जन्म 19वीं शताब्दी में हुआ। यह कोई एक दिन या घटना नहीं थी, बल्कि धीरे-धीरे बढ़ती एक चेतना थी। अंग्रेजी शासन के दौरान भारतीयों ने अपनी संस्कृति, भाषा और इतिहास के प्रति गर्व महसूस करना शुरू किया।
ब्रिटिश नीतियों ने अनजाने में ही भारतीय एकता को मजबूत किया। अंग्रेजों ने एक केंद्रीय प्रशासन, रेलवे और अंग्रेजी शिक्षा की व्यवस्था लागू की, जिससे देश के अलग-अलग हिस्सों के लोग एक-दूसरे से जुड़े। लेकिन इसी के साथ नमक कर, जमींदारी प्रथा और आर्थिक शोषण ने लोगों में नाराजगी पैदा की।
महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक, भगत सिंह और कई अन्य नेताओं ने इस भावना को जन-आंदोलन में बदल दिया। 1857 का स्वतंत्रता संग्राम, हालांकि असफल रहा, लेकिन इसे अक्सर राष्ट्रवाद की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। बाद में, 20वीं शताब्दी में स्वतंत्रता के लिए संघर्ष तेज हो गया।
यह राष्ट्रवाद धीरे-धीरे सिर
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