भारत और यूक्रेन संकट: तटस्थता क्यों?
फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद पूरी दुनिया ने अपना रुख साफ कर दिया। लेकिन भारत ने तब से लगातार एक संतुलित और तटस्थ रुख अपनाया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और बाद में महासभा में जब रूस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पेश किए गए, तो भारत ने न तो रूस के खिलाफ वोट किया, न ही समर्थन किया। 3 मार्च 2022 को संयुक्त राष्ट्र में भारत वोटिंग से दूर रहा, जो उसकी आधिकारिक तटस्थता को दर्शाता है।
लेकिन क्यों भारत ऐसा कर रहा है? एक तरफ यूक्रेन के साथ सहानुभूति जताने के बावजूद, भारत के पास रूस के साथ गहरे रणनीतिक संबंध हैं। रूस लंबे समय से भारत का प्रमुख रक्षा भागीदार रहा है। भारत की सेना में इस्तेमाल होने वाले हथियारों में बड़ा हिस्सा रूसी मूल का है। इसलिए सीधे तौर पर रूस के खिलाफ खड़े होना भारत के लिए राजनयिक और रक्षा दोनों स्तर पर जोखिम भरा हो सकता है।
इसके अलावा, भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर बहु
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।