जूझ: एक आत्मकथात्मक यात्रा
‘जूझ’ आनंद यादव द्वारा रचित एक ऐसी रचना है जो आत्मकथामक उपन्यास की श्रेणी में आती है। यह केवल एक काल्पनिक कहानी नहीं है, बल्कि लेखक के बचपन के अनुभवों और संघर्षों का झांकी है। इस पाठ में हम उस लड़के की दुनिया में प्रवेश करते हैं, जो पढ़ने लिखने का जुनून रखता है, लेकिन जिसके सपनों के सामने जाति, समाज और पारिवारिक परिस्थितियों की दीवारें खड़ी होती हैं।
लेखक के पिता उन्हें विद्यालय नहीं जाने देते और उन्हें खेतों में काम करने के लिए विवश करते हैं। ऐसे में 'पढ़ने की जिद' और 'खेतों में खींचे जाने' के बीच लेखक की जूझ साफ झलकती है। यह जूझ सिर्फ शिक्षा तक पहुंच पाने के लिए नहीं है, बल्कि अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने की लड़ाई भी है।
इस उपन्यास के माध्यम से आनंद यादव ने न सिर्फ अपने बचपन के संघर्षों को जीवंत किया है, बल्कि उन सामाजिक बंधनों को भी उजागर किया है जो आज भी कई बच्चों को शिक्षा से दूर रखते ह
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