प्राचीन राजाओं की थाली: स्वाद का राजसी इतिहास

प्राचीन काल में राजा-महाराजा न केवल राजनीति और युद्ध में, बल्कि खान-पान में भी अपनी विशिष्टता दिखाते थे। उनकी थाली आज की तरह विविधतापूर्ण होती थी, जहाँ शाकाहारी और मांसाहारी दोनों व्यंजनों का समान स्थान था।

कुछ राजा, धार्मिक या आध्यात्मिक कारणों से, पूर्णतया शाकाहारी रहते थे। लेकिन अधिकतर राजा शिकार के बाद ताजे मांस से तैयार व्यंजनों का आनंद लेते थे। मांस के अलावा, चावल, दालें, सब्जियाँ, घी और विशेष मिठाइयाँ उनके भोजन का हिस्सा होती थीं।

राजमहल में खाना बनाने के लिए पूरे राज्य के सबसे निपुण रसोइए नियुक्त किए जाते थे। वे न केवल स्वाद के लिए, बल्कि राज्य की संस्कृति और ऋतु के अनुसार सामग्री के आधार पर विशिष्ट व्यंजन तैयार करते थे। कहा जाता है कि कुछ राजदरबारों में दिन में कई बार भोजन परोसा जाता था और हर भोजन अलग-अलग तरह का होता था।

इतिहास के अनुसार, मौर्यकाल में तो राज

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