मां काली का अवतार कैसे हुआ?
मां काली का जन्म पौराणिक कथाओं के अनुसार एक अद्भुत घटना के दौरान हुआ। जब भगवान शिव ने समुद्र मंथन से निकले घोर विष को अपने कंठ में धारण किया, तो वह विष उनके शरीर में एक भयंकर ऊर्जा पैदा करने लगा। उसी समय, भगवती का एक अंश शिव के भीतर प्रवेश कर गया।
यह अंश, विष के प्रभाव से काले वर्ण में परिवर्तित हो गया। शिव को अपने भीतर इस शक्ति का एहसास हुआ, तो उन्होंने अपना तीसरा नेत्र खोल दिया। उसी क्षण, एक भयानक और विकराल रूप में मां काली प्रकट हुईं। उनका शरीर काला था, जो अंधकार और समय के ऊपर उनके अधिकार को दर्शाता है।
काली मां को केवल विनाश की देवी नहीं माना जाता, बल्कि वे संहार के बाद नए सृजन की भी प्रतीक हैं। उनके रूप में भय और करुणा दोनों समाई हुई हैं। वह असुरों का विनाश करती हैं, लेकिन भक्तों की रक्षा भी करती हैं।
हर साल काली चतुर्दशी और दीपावली के आसपास, दक्षिण भारत सहित कई हिस्सों में मां काली की पूजा की जाती है। उनकी
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