गांधीजी की लंदन यात्रा: एक संघर्ष की निरंतरता

महात्मा गांधी की दक्षिण अफ्रीका में जेल यात्रा उनके सत्याग्रह के संघर्ष का हिस्सा थी। 1909 में उन्हें वोल्क्सहर्स्ट और प्रिटोरिया में तीन महीने की सजा सुनाई गई थी। यह सजा उनके असहयोग आंदोलन और भारतीयों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने के लिए दी गई थी।

जेल से रिहा होने के बाद, गांधीजी ने भारतीय समुदाय के लिए न्याय की गुहार लगाने के उद्देश्य से लंदन की यात्रा की। वह ब्रिटिश सरकार के सामने दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों की दुर्दशा को रखना चाहते थे। उनका मानना था कि लंदन में स्थित उच्च अधिकारियों को प्रभावित करके वह परिवर्तन ला सकते हैं।

लेकिन उनका यह प्रयास व्यर्थ गया। ब्रिटिश सरकार ने उनकी बातों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। फिर भी, यह यात्रा गांधीजी के लिए एक महत्वपूर्ण अनुभव थी। इसने उन्हें यह समझने में मदद की कि ब्रिटिश सत्ता को बदलाव के लिए अपील करने के बजाय, उसके खिलाफ संगठित लड़ाई लड़नी होगी।

1913 म

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