गांधी जी की वतन वापसी

9 जनवरी, 1915 को जब एसएस अरबिया नामक जहाज बॉम्बे (अब मुंबई) के डॉक में लगा, तो उस दिन भारत के इतिहास में एक नया अध्याय शुरू हुआ। उस जहाज पर सवार थे मोहनदास करमचंद गांधी — एक ऐसे व्यक्ति जो दक्षिण अफ्रीका में अपने सात साल के संघर्ष के बाद भारत लौट रहे थे।

गांधी जी पहले से ही एक प्रसिद्ध राजनीतिक कार्यकर्ता थे। अफ्रीका में उन्होंने भारतीय समुदाय के लिए नस्लीय भेदभाव के खिलाफ अहिंसक प्रतिरोध का मार्ग खोला था। अब वे अपने देश की धरती पर कदम रख रहे थे, लेकिन इस बार एक नए मिशन के साथ — भारत की आजादी के लिए संघर्ष।

लौटने के बाद गांधी जी ने तुरंत देश की यात्रा शुरू कर दी। उन्होंने गाँव-गाँव जाकर लोगों की दशा देखी, उनकी बातें सुनीं और भारतीय समाज की गहराईयों को समझा। यह यात्रा सिर्फ भूगोल की नहीं थी, बल्कि एक आध्यात्मिक और राष्ट्रीय जागृति की यात्रा थी। धीरे-धीरे वे लाखों लोगों के दिलों में बसने लगे।

उनकी यह व

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय