महात्मा गांधी: अहिंसा के मार्ग पर
महात्मा गांधी ने न केवल भारत की आजादी के लिए संघर्ष में अहिंसा को सबसे शक्तिशाली हथियार के रूप में प्रस्तुत किया, बल्कि सामाजिक न्याय की नींव भी इसी सिद्धांत पर रखी। वे महज एक राजनेता या क्रांतिकारी नहीं थे, बल्कि एक ऐसे नेता थे जिन्होंने आम आदमी के दर्द को समझा और उसे बदलाव का हथियार बनाया।
एक वकील होने के नाते, गांधी ने अपनी पेशेवर क्षमता का इस्तेमाल वंचितों के लिए लड़ने में किया। दक्षिण अफ्रीका में भी उन्होंने नस्लीय भेदभाव के खिलाफ अपनी लड़ाई की शुरुआत की। लेकिन जब वे भारत लौटे, तो उनका फोकस ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ एक ऐसी लड़ाई छेड़ने पर हुआ, जो तलवारों से नहीं, बल्कि सत्य और अहिंसा पर आधारित हो।
सत्याग्रह की यह अवधारणा उनकी सबसे बड़ी देन है। गांधी ने दुनिया को दिखाया कि कैसे प्यार, धैर्य और नैतिक साहस से एक साम्राज्य भी घुटने टेक सकता है। उनके इस दृष्टिकोण ने न सिर्फ भारत
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