कृष्ण के जाने के बाद राधा का विरह

जब कृष्ण वृंदावन छोड़कर मथुरा चले गए, तो राधा के जीवन में एक गहरा विरह उतर आया। प्रेम की देवी, भक्ति की अवतारिणी राधा के लिए यह विछोह असहनीय था। गर्ग संहिता और ब्रह्म वैवर्त पुराण के अनुसार, राधा ने कृष्ण के जाने के बाद घर-परिवार छोड़ दिया।

वे बरसाना में नहीं रहीं। उन्होंने अपना मायावी रूप, जिसे 'छाया राधा' कहा जाता है, पीछे छोड़ दिया ताकि लोगों को लगे कि वे अभी भी वहीं हैं। लेकिन वास्तविक राधा कदली वन की ओर चल दीं — एक घना जंगल, जहाँ उनकी भक्ति और विरह की भावना अपनी पूरी तीव्रता में बहती थी।

यह वन उनके टूटे हृदय का प्रतीक बन गया। वहाँ वे कृष्ण के नाम जपतीं, उनकी स्मृतियों में खो जातीं, और प्रेम की ऐसी उच्चतम अवस्था में पहुँच गईं, जिसे केवल भक्ति के माध्यम से ही समझा जा सकता है।

राधा का विरह सिर्फ एक कहानी नहीं — यह प्रेम की पूर्णता का द्योतक है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि स

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय