भारतीय राष्ट्रवाद का उदय
भारतीय राष्ट्रवाद का जन्म 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में हुआ, जब देश के लोगों में राजनीतिक चेतना की लहर तेजी से फैलने लगी। अंग्रेजी शिक्षा, पत्रकारिता और बढ़ते हुए सामाजिक सुधार आंदोलनों ने इस चेतना को बल दिया।
यह राष्ट्रवाद सिर्फ एक विचार नहीं, बल्कि एक जीवंत आंदोलन बन गया, जिसने लाखों भारतीयों को एक सूत्र में बांध दिया। ब्रिटिश उपनिवेशवादी नीतियों ने भारत की आर्थिक और सांस्कृतिक जड़ों को कमजोर किया, जिसके खिलाफ लोगों में प्रतिरोध की भावना जाग उठी।
इस प्रतिक्रिया ने एक संगठित राष्ट्रीय आंदोलन की नींव रखी। 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना इसी भावना का परिणाम थी। धीरे-धीरे, राष्ट्रवाद केवल शहरों तक सीमित रहने की बजाय गांव-गांव में फैलने लगा।
महात्मा गांधी जैसे नेताओं के नेतृत्व में यह आंदोलन जनआंदोलन बन गया। राष्ट्रवाद अब सिर्फ़ स्वतंत्रता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश की ए
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