गांधी जी की पितृ-प्रेम की मिसाल
महात्मा गांधी सिर्फ एक राष्ट्रनेता नहीं थे, बल्कि एक संवेदनशील पिता भी थे। एक छोटी सी घटना उनके प्यार और जिम्मेदारिता की झलक दिखाती है। जब उनका बेटा जमनालाल छोटा था, तो वह गुड़ बहुत पसंद करता था। एक दिन उसने जमकर गुड़ खा लिया, तो बापू ने उसे अपने पास बिठाया और प्यार से समझाया।
“बेटा, गुड़ खाना बुरा नहीं, लेकिन ज्यादा खाने से दांतों में कीड़े लग जाते हैं,” उन्होंने कहा। उनकी यह सलाह सिर्फ एक चेतावनी नहीं थी, बल्कि एक पिता की फिक्र थी। गांधी जी स्वयं सादगी और संयम में विश्वास करते थे और वह चाहते थे कि उनके बच्चे भी स्वस्थ और संतुलित जीवन जिएं।
यह घटना उनके पारिवारिक जीवन की मार्मिक झांकी देती है। वे त्यागी और कठोर थे, लेकिन अपने परिवार के प्रति उनका प्यार गहरा और निस्वार्थ था। जमनालाल को गुड़ न खाने की सलाह देने के पीछे केवल दांतों की सेहत नहीं, बल्कि आदतों के निर्माण की चिंता भी थी।
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