छत्रपति शिवाजी महाराज और 'स्वराज्य' का संकल्प
छत्रपति शिवाजी महाराज का नारा था — “स्वराज्य”। यह केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक संकल्प, एक स्वप्न था। शिवाजी महाराज ने पहली बार 1645 ईस्वी में एक पत्र में इस शब्द का प्रयोग किया था। तब उनकी उम्र महज 15 साल थी, लेकिन उनके मन में भारत को विदेशी शासन से मुक्त कराने की अदम्य इच्छा जग चुकी थी।
स्वराज्य का अर्थ केवल राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं था। यह एक व्यापक दृष्टिकोण था — जहाँ लोगों को अपने धर्म, संस्कृति और परंपराओं में आत्मविश्वास के साथ जीने का अधिकार मिले। शिवाजी महाराज ने मुगल और बीजापुर के अत्याचारों के खिलाफ खड़े होकर प्रदर्शित किया कि आम जनता की सुरक्षा और न्याय ही सच्ची शासन प्रणाली की नींव है।
उनका आंदोलन सिर्फ एक राज्य स्थापित करने तक सीमित नहीं था। यह पूरे भारतवर्ष में आत्मसम्मान और स्वाभिमान की भावना जगाने का प्रयास था। आज भी 'स्वराज्य' शब्द में उसी आत्मनिर्भरता और स्वाधीनता की गूंज ह
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