बाल गंगाधर तिलक और जातिवाद: एक विवादास्पद पहलू

बाल गंगाधर तिलक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रमुख नेता थे, जिन्हें "लोकमान्य" के नाम से जाना जाता है। लेकिन उनके राष्ट्रवादी योगदान के बावजूद, उनके विचारों में कुछ विरोधाभास भी थे। खास तौर पर, जाति प्रणाली के प्रति उनका रवैया कई इतिहासकारों और समाज सुधारकों के लिए चिंता का विषय रहा है।

तिलक चित्पावन ब्राह्मण समुदाय से आते थे, जो महाराष्ट्र के एक प्रभावशाली उप-समूह हैं। इस पृष्ठभूमि के कारण, वे जाति व्यवस्था के प्रति पारंपरिक दृष्टिकोण रखते थे। कई बार उन्होंने जातिगत असमानता का समर्थन किया और समाज में ब्राह्मणों की श्रेष्ठता पर जोर दिया।

उदाहरण के लिए, उन्होंने छुआछूत के खिलाफ आंदोलनों का विरोध किया और सामाजिक समानता की बजाय धार्मिक परंपराओं को बरकरार रखने पर जोर दिया। यही कारण है कि कई आलोचक उन्हें जातिवादी कहते हैं।

हालांकि, यह भी सच है कि तिलक का समय एक ऐसा दौर था

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