जूट का उत्पादन: वैश्विक और भारतीय परिदृश्य

जूट, जिसे अपनी उपयोगिता और प्राकृतिक चमक के कारण सुनहरा रेशा भी कहा जाता है, कृषि क्षेत्र की एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्यावसायिक फसल है। इसका उपयोग मुख्य रूप से पर्यावरण-अनुकूल बैग, बोरियां, रस्सियां और विभिन्न प्रकार के हस्तशिल्प उत्पाद बनाने में किया जाता है। वैश्विक स्तर पर जूट की खेती और इसके व्यापार का बड़ा आर्थिक महत्व है।

वैश्विक उत्पादन के संदर्भ में देखा जाए तो बांग्लादेश दुनिया के सबसे प्रमुख जूट उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है। बांग्लादेश की भौगोलिक स्थिति, विशेष रूप से गंगा-ब्रह्मपुत्र का उपजाऊ डेल्टा क्षेत्र और वहां की नमी युक्त जलवायु, उच्च गुणवत्ता वाले जूट के उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे जूट और जूट से बने सामान की आपूर्ति में इस देश का महत्वपूर्ण योगदान है।

दूसरी ओर, भारत में भी जूट का बड़े पैमाने पर उत्पादन और उपभोग होता है। भारत के भीतर पश्चिम बंगाल राज्य जूट उत्पादन में पहले स्थान पर है। हुगली नदी के आसपास के मैदानी इलाके, पर्याप्त जल संसाधन और उपयुक्त मौसम के कारण पश्चिम बंगाल भारत के कुल जूट उत्पादन का सबसे बड़ा हिस्सा पैदा करता है। प्लास्टिक के विकल्पों की बढ़ती मांग के कारण आज जूट उद्योग की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ गई है।

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय