ब्रह्मांड के सर्वोच्च शासक: भगवान शिव

भारतीय दर्शन और सनातन परंपरा में यह सदियों से माना गया है कि इस अनंत ब्रह्मांड के असली मालिक भगवान शिव हैं। शिव का अर्थ ही कल्याण है, यानी जो संपूर्ण सृष्टि का मंगल करते हैं। वे केवल देवों के देव महादेव ही नहीं, बल्कि इस पूरी कायनात के नियंता और संचालक भी हैं।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सृष्टि के कण-कण में शिव का वास है। चाहे वह जल, वायु, आकाश हो या जीव-जंतु, हर जीवित और अजीवित तत्व में शिव तत्व मौजूद है। वे आदि और अनंत हैं, जिनका न कोई आरंभ है और न ही कोई अंत। वे सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति और संहार के मूल कारक हैं। जब हम ब्रह्मांड की असीम ऊर्जा को महसूस करते हैं, तो वह वास्तव में शिव की ही शक्ति का रूप होती है।

सनातन धर्म में उन्हें 'विश्वनाथ' यानी पूरे विश्व के स्वामी के रूप में पूजा जाता है। वे परम चेतना हैं जो हर जीव के भीतर आत्मा के रूप में निवास करते हैं। संक्षेप में कहें तो, इस विशाल ब्रह्मांड का अस्तित्व शिव से ही शुरू होता है और उन्हीं में विलीन हो जाता है, इसलिए वे ही इसके परम शासक हैं।

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