सलीम और अनारकली: एक अधूरा प्यार
अनारकली की मौत के बाद सलीम का जीवन एक गहरे दर्द में बदल गया। वह दिल्ली के महलों का राजकुमार था, लेकिन उसका दिल सिर्फ एक नाम के लिए धड़कता था—अनारकली। कहा जाता है कि जब अनारकली को दीवार में ज़िंदा दफ़न कर दिया गया, तो सलीम के दिल में एक ज़ख़्म उठ खड़ा हुआ, जो कभी नहीं भरा।
लेकिन सलीम जीवित रहा। वह सम्राट जहाँगीर बना। उसके हाथ में साम्राज्य था, ताकत थी, लेकिन दिल में सिर्फ एक खाली जगह—अनारकली की याद। कहते हैं, मृत्यु के समय भी उसके होंठों पर उसका नाम था। कोई रानी हो या राजदरबार, कुछ भी उस खोट को नहीं भर सका जो अनारकली के जाने से पैदा हुआ था।
क्या अनारकली वास्तव में थी? इतिहास इस पर अस्पष्ट है। लेकिन जहाँगीर के दिल में उसकी छाप इतनी गहरी थी कि कालांतर में भी उनकी कहानी ज़िंदा है। ये प्यार, विरोध, और यादें आज भी लोगों के दिलों में गूंजती हैं—एक ऐसी दास्तान जो इतिहास और कल्पना के बीच डगमग
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