कुरान में नींद और आराम का महत्व
इस्लाम में आराम और नींद को एक वरदान माना गया है। कुरान में स्पष्ट कहा गया है कि अल्लाह कभी नहीं सोते, न ही उन्हें नींद आती है। वे सदैव जागरूक और हर काम पर निगरानी करने वाले हैं। “उनको न नींद आती है और न ही झपकी” — यह आयत (2:255, आयतुल कुर्सी) उनकी सर्वोच्च शक्ति और निरंतरता को दर्शाती है।
लेकिन मनुष्य, जो उनकी रचना है, वह कमजोर है। उसे शारीरिक और मानसिक आराम की आवश्यकता होती है। कुरान कहता है कि अल्लाह ने रात को आराम के लिए बनाया है — एक विश्राम का समय, जब आंखें बंद होती हैं और शरीर को ताकत वापस मिलती है। नींद इंसान की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी ज़रूरत है — जो उसे अपने रब की ताकत का एहसास कराती है।
इसलिए, इस्लाम में अच्छी नींद लेना न सिर्फ जायज़ है, बल्कि एक तरह से इबादत भी है। जब इंसान नींद के बाद उठता है और शुक्र अदा करता है, तो वह अल्लाह के अनुग्रह को महसूस करता है। कुछ सही आदतों, जैसे
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