ईसाइयों की भाषा क्या है?
ईसाइयों की भाषा के बारे में बात करते हुए यह समझना ज़रूरी है कि यीशु मसीह के समय में कौन-कौन सी भाषाएँ बोली जाती थीं। उस दौरान यहूदी इलाके में अरामी भाषा स्थानीय स्तर पर सबसे अधिक बोली जाती थी। यीशु खुद नासरत के थे, जहाँ अरामी ही मुख्य भाषा थी। इसलिए उनके दैनिक संवाद और उपदेश शायद अरामी में ही होते थे।
अरामी ही उनकी मातृभाषा थी, लेकिन वे इब्रानी भी जानते थे। इब्रानी पवित्र लिखित ग्रंथों और मंदिर में उपदेशों की भाषा थी। इसलिए यीशु सिनेगाग में शास्त्र पढ़ सकते थे। साथ ही, उस समय रोमन साम्राज्य के अधीन यूनानी भाषा आधिकारिक और व्यापारिक स्तर पर प्रचलित थी। कई इतिहासकार मानते हैं कि यीशु के अनुयायी भी यूनानी बोलते थे, और नए नियम के ग्रंथ यूनानी में ही लिखे गए।इसलिए, ईसाइयों की "भाषा" को एक ही शब्द में नहीं बताया जा सकता। यदि हम धार्मिक संदर्भ में देखें, तो अरामी यीशु की मूल भाषा थी, लेकिन ईसाई धर्म के प्रस
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