उत्तराखंड का पहला जैविक जिला: रुद्रप्रयाग

पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में कदम बढ़ाते हुए पहाड़ी राज्य उत्तराखंड ने कृषि क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रुद्रप्रयाग राज्य का पहला पूर्ण जैविक जिला बन गया है। इस महत्वपूर्ण निर्णय की घोषणा 25 मई 2015 को राज्य सरकार द्वारा की गई थी, जिसने पूरे क्षेत्र में प्राकृतिक और रसायन-मुक्त खेती को बढ़ावा देने की नींव रखी।

रुद्रप्रयाग को जैविक जिला घोषित करने का मुख्य उद्देश्य हानिकारक रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रयोग को खत्म करना है। इस पहल के तहत किसानों को पारंपरिक और जैविक खेती के तरीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। जैविक खेती न केवल मिट्टी की उर्वरता और स्वास्थ्य को बनाए रखती है, बल्कि फसलों की गुणवत्ता और पोषण मान को भी बेहतर बनाती है।

उत्तराखंड की जलवायु और भौगोलिक स्थिति जैविक कृषि के लिए बेहद अनुकूल है। रुद्रप्रयाग की इस सफलता के बाद राज्य के अन्य जिलों में भी प्राकृतिक खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे स्थानीय किसानों की आय में वृद्धि हो रही है और शुद्ध, रसायन-मुक्त खाद्य उत्पाद लोगों तक पहुँच रहे हैं। रुद्रप्रयाग का यह प्रयास सतत कृषि और हरित भविष्य की ओर एक प्रेरणादायक कदम है।

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