कुरान का इतिहास: इसका प्रकटीकरण और संकलन

कुरान इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र ग्रंथ है। इसे किसी एक व्यक्ति ने एक ही समय में नहीं लिखा, बल्कि यह पैगंबर मोहम्मद पर लगभग 23 वर्षों की अवधि (610 ईस्वी से 632 ईस्वी) के दौरान धीरे-धीरे प्रकट हुआ। मान्यता के अनुसार, ईश्वर (अल्लाह) ने अपने संदेशवाहक देवदूत जिब्रील (गैब्रिएल) के माध्यम से ये संदेश पैगंबर तक पहुँचाए थे।

पैगंबर मोहम्मद स्वयं लिखना-पढ़ना नहीं जानते थे, इसलिए जब भी कोई संदेश प्रकट होता, वे उसे अपने साथियों को सुनाते थे। उनके साथी इन आयतों को याद कर लेते थे और चमड़े, खजूर की पत्तियों, हड्डियों और पत्थरों पर लिख लिया करते थे। ज़ैद बिन साबित जैसे प्रमुख लेखकों ने इन संदेशों को लिपिबद्ध करने में मुख्य भूमिका निभाई।

पैगंबर मोहम्मद के निधन के बाद, पहले खलीफा अबू बक्र के समय में इन सभी बिखरे हुए अंशों को पहली बार एक जगह एकत्र किया गया। आगे चलकर तीसरे खलीफा उस्मान इब्न अफ्फान ने इसे एक मानक पुस्तक का आधिकारिक रूप दिया और इसकी प्रामाणिक प्रतियां विभिन्न इस्लामी राज्यों में भेजीं। आज पढ़ी जाने वाली कुरान वही मूल और प्रामाणिक रूप है।

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