क़ुरआन का इतिहास: यह कहाँ और कैसे लिखा गया?
क़ुरआन इस्लाम धर्म का पवित्र ग्रंथ है। अगर यह सवाल पूछा जाए कि क़ुरआन कहाँ लिखा गया था? तो इसका सीधा संबंध तत्कालीन अरब साम्राज्य के दो प्रमुख शहरों—मक्का और मदीना से है। क़ुरआन किसी एक स्थान पर या एक ही दिन में नहीं लिखा गया, बल्कि यह लगभग 23 वर्षों की लंबी अवधि में धीरे-धीरे प्रकट हुआ।
ईश्वर (अल्लाह) की ओर से पैगंबर मोहम्मद साहब पर पहली आयत मक्का के पास स्थित हिरा गुफा (Cave of Hira) में नाज़िल (प्रकट) हुई थी। मक्का में प्रकट हुए अंशों को 'मक्की' और मदीना में प्रकट हुए अंशों को 'मदनी' कहा जाता है। शुरुआत में जब भी आयतें नाज़िल होती थीं, पैगंबर साहब के साथी (सहाबा) उन्हें ज़बानी याद कर लेते थे और खजूर की पत्तियों, चमड़े के टुकड़ों, समतल पत्थरों तथा हड्डियों पर लिख लिया करते थे।
पैगंबर साहब के बाद, प्रथम खलीफा हज़रत अबू बक्र के समय में इन सभी बिखरी हुई लिखित सामग्री को एक साथ एकत्र किया गया। इसके बाद तीसरे खलीफा हज़रत उस्मान के दौर में क़ुरआन की एक आधिकारिक किताब (मुसहफ) तैयार की गई, जिसकी प्रतियां विभिन्न क्षेत्रों में भेजी गईं। इस तरह अरब की पावन धरती मक्का और मदीना में क़ुरआन का लेखन और संकलन पूरा हुआ।
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