श्रीकृष्ण की पटरानी: कौन थीं उनकी मुख्य पत्नी?

सनातन धर्म और पौराणिक कथाओं में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन के कई पहलू देखने को मिलते हैं। अक्सर आम बोलचाल या लोक कथाओं में राधा जी का नाम श्रीकृष्ण के साथ सबसे पहले लिया जाता है। उनका प्रेम निश्छल और आध्यात्मिक था, लेकिन जब बात विवाह और सामाजिक रूप से उनकी पत्नी की आती है, तो इतिहास और ग्रंथ कुछ अलग बताते हैं।

पौराणिक ग्रंथों, विशेषकर महाभारत और श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, श्रीकृष्ण की मुख्य और पहली पत्नी देवी रुक्मिणी थीं। रुक्मिणी को साक्षात धन की देवी लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। उन्होंने श्रीकृष्ण के गुणों और उनकी महिमा को सुनकर उन्हें मन ही मन अपना पति मान लिया था। जब उनके भाई ने उनका विवाह जबरन शिशुपाल से करना चाहा, तब श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी की इच्छा का सम्मान करते हुए उनसे प्रेम विवाह (राक्षस विवाह) किया था।

श्रीकृष्ण की कुल आठ मुख्य रानियां थीं, जिन्हें 'अष्टभार्या' कहा जाता है। इनमें रुक्मिणी के अलावा सत्यभामा, जाम्बवती, कालिंदी, मित्रविंदा, नाग्नजिती, भद्रा और लक्ष्मणा शामिल थीं। इन सभी में देवी रुक्मिणी को ही 'पटरानी' यानी मुख्य रानी का दर्जा प्राप्त था। इसलिए, धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से श्रीकृष्ण की असली और मुख्य पत्नी रुक्मिणी ही थीं, जिन्होंने द्वारका के राजवैभव में उनका साथ निभाया।

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