क्या अंग्रेजों को भारत से चाय मिलती थी?
हाँ, न सिर्फ मिलती थी, बल्कि कुछ ही दशकों में भारत अंग्रेजों के लिए चाय का सबसे बड़ा स्रोत बन गया। 1839 में लंदन की नीलामी में असम की पहली आठ पेटियाँ बिकीं। ये छोटी शुरुआत एक बड़े इतिहास की नींव थी।
चीन से लेकर भारत तक का सफरशुरुआत में ब्रिटेन को चाय चीन से मिलती थी। लेकिन लंबी आपूर्ति लाइन, राजनीतिक तनाव और अंग्रेजों की बढ़ती चाय की भूख ने ईस्ट इंडिया कंपनी को अपना स्रोत बदलने पर मजबूर किया। तब असम में जंगलों में उगने वाली जंगली चाय के पौधे मिले। ब्रिटिश अधिकारियों ने इसकी क्षमता देखी और यहाँ चाय की खेती को बड़े पैमाने पर शुरू किया।
धीरे-धीरे, असम और फिर दार्जिलिंग, नीलगिरी जैसे क्षेत्र चाय के केंद्र बन गए। 1888 तक भारत ब्रिटेन को चाय का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया। चीन को पीछे छोड़कर, भारत ने अंग्रेजी दोपहर की चाय की थाली को नई पहचान दी।
यह सिर्फ एक व्यापार नहीं था — यह एक सांस
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