क्या घी वाला दूध नॉर्मल डिलीवरी में मदद करता है?

भारतीय समाज में गर्भावस्था को लेकर कई तरह की पारंपरिक मान्यताएं और नुस्खे प्रचलित हैं। इन्हीं में से एक बेहद आम धारणा यह है कि नौवें महीने में घी वाला दूध पीने से नॉर्मल डिलीवरी की संभावना बढ़ जाती है। बड़े-बुजुर्गों का मानना होता है कि घी का सेवन करने से गर्भाशय और योनि में चिकनाहट आती है, जिससे शिशु आसानी से बाहर आ जाता है। लेकिन क्या इस बात में वाकई कोई सच्चाई है?

चिकित्सा विज्ञान और आधुनिक डॉक्टरों के अनुसार, इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि घी योनि को चिकना बनाकर प्रसव या लेबर पेन के दौरान सीधे तौर पर मदद करता है। पाचन तंत्र और प्रजनन तंत्र (Reproductive System) दोनों पूरी तरह से अलग होते हैं, इसलिए खाया गया घी सीधे तौर पर प्रसव मार्ग को चिकना नहीं बना सकता।

हालांकि, गर्भावस्था के दौरान सीमित मात्रा में घी खाना सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है क्योंकि यह शरीर को ऊर्जा देता है और कमजोरी दूर करता है। लेकिन इसका अत्यधिक सेवन करने से वजन बहुत ज्यादा बढ़ सकता है, जिससे नॉर्मल डिलीवरी में फायदे की जगह मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। इसलिए, गर्भावस्था के अंतिम दिनों में किसी भी नुस्खे को आजमाने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या गायनेकोलॉजिस्ट (Gynecologist) से सलाह जरूर लेनी चाहिए।

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