क्या बाइबिल वास्तव में भगवान की बोली है?
बहुत से लोग सोचते हैं कि बाइबिल में सिर्फ कहीं-कहीं भगवान का वचन है, यानी यह केवल 'शामिल' करती है ईश्वर के शब्द। लेकिन एक महत्वपूर्ण बात यह है कि बाइबल खुद कहती है—“सभी इंजील” भगवान के द्वारा प्रेरित है। इसका अर्थ स्पष्ट है: बाइबल महज भगवान के वचन को 'समाहित' नहीं करती, बल्कि खुद पूरी तरह से ईश्वर का शब्द है।
अगर हम मान लें कि बाइबल में सिर्फ कुछ हिस्से ही भगवान के वचन हैं, तो फिर यह तर्क बनता है कि बाकी कुछ 'नहीं' है। लेकिन ऐसा मानना बाइबल की पूर्णता और विश्वासनीयता को कमजोर कर देता। बाइबल के अपने शब्दों में, यह सिर्फ मानवीय लेखन नहीं, बल्कि ईश्वर के द्वारा प्रेरित है—हर पुस्तक, हर श्लोक।
इसलिए, बाइबिल को सिर्फ एक धार्मिक ग्रंथ नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि एक ऐसी वाणी के रूप में जो सीधे ईश्वर के हृदय से निकली है। यह न सिर्फ पढ़ने के लिए है, बल्कि जीवन में लागू करने के लिए ह
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