क्या विज्ञान और तकनीक एक-दूसरे के बिना संभव हैं?

आज के दौर में हम अक्सर विज्ञान और तकनीक को एक साथ जोड़कर देखते हैं, लेकिन ये दोनों एक-दूसरे के बिना भी अस्तित्व में रह सकते हैं। तकनीक के बिना विज्ञान और विज्ञान के बिना तकनीक का होना पूरी तरह से संभव है। इतिहास और ज्ञान की दुनिया में ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं जो इस विचार को साबित करते हैं।

इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण शुद्ध गणित (Pure Mathematics) है। प्राचीन काल में गणित जैसे विज्ञान को विकसित करने के लिए किसी जटिल मशीनरी या उन्नत तकनीक की आवश्यकता नहीं पड़ी। पाइथागोरस के सिद्धांतों से लेकर जापान की पारंपरिक मंदिर ज्यामिति (Sangaku) तक, गणित का यह अद्भुत रूप बिना किसी आधुनिक प्रौद्योगिकी के फला-फूला। विचारकों और गणितज्ञों ने केवल अपने मस्तिष्क, तर्क शक्ति और सरल रेखाचित्रों के बल पर महान सिद्धांतों की रचना की।

दूसरी तरफ, इतिहास में कई ऐसी तकनीकें भी विकसित हुईं जो किसी वैज्ञानिक प्रयोगशाला या नियम के ज्ञान के बिना बनीं। इंसान ने वैज्ञानिक सिद्धांतों को समझने से बहुत पहले केवल अनुभव और जरूरत के आधार पर आग जलाना, मिट्टी के बर्तन बनाना और पहिए का निर्माण करना सीख लिया था। संक्षेप में कहें तो, यद्यपि आज विज्ञान और तकनीक एक-दूसरे के पूरक हैं, लेकिन बुनियादी रूप से दोनों स्वतंत्र रूप से भी पनप सकते हैं।

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय