चेचक: एक समय में माता मानी जाती थी

आज चेचक (चिकनपॉक्स) को एक सामान्य बीमारी माना जाता है, लेकिन कुछ दशक पहले तक इसे "चेचक माता" के नाम से जाना जाता था। लोग इसे एक देवी या माता की तरह मानते थे। ऐसा इसलिए क्योंकि बीमारी आती थी, बच्चों को गुजरना पड़ता था, और फिर स्वस्थ हो जाते थे। इस दौरान परिवार विशेष तौर पर महिलाएं घर में तुलसी के पौधे के पास दीया जलाते थे और प्रार्थना करते थे कि "माता बच्चे को छोड़ दें"।

क्यों माता कहा जाता था?

लोगों का मानना था कि चेचक एक आध्यात्मिक शक्ति है जो बच्चों को आश्रय देती है। इसलिए उसे माता कहा जाता था। इसके पीछे एक सांस्कृतिक विश्वास था कि बीमारी बुराई नहीं, बल्कि एक तरह की परीक्षा या आशीर्वाद है। बच्चे जब ठीक हो जाते थे, तो परिवार धन्यवाद देता था, मानो माता ने अपना काम पूरा कर दिया हो।

आज चेचक के टीके के आने से इसका खतरा काफी कम हो गया है। लेकिन गांवों और पारंपरिक परिवारों में अब भी कुछ लोग इस बीमारी

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