टाटा मोटर्स और जगुआर लैंड रोवर की ऐतिहासिक डील

भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के इतिहास में 2 जून 2008 का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। इसी दिन टाटा मोटर्स ने अमेरिकी ऑटो दिग्गज फोर्ड से दो प्रसिद्ध ब्रिटिश लग्जरी ब्रांड्स—जगुआर (Jaguar) और लैंड रोवर (Land Rover)—को खरीदा था। यह सौदा न केवल वैश्विक व्यापार जगत के लिए एक बड़ा सरप्राइज था, बल्कि भारतीय कार निर्माता कंपनी के बढ़ते प्रभुत्व का भी प्रतीक था।

यह अधिग्रहण केवल एक व्यावसायिक सौदा नहीं था, बल्कि रतन टाटा की एक बड़ी व्यक्तिगत जीत भी थी। 1999 में जब टाटा मोटर्स की पैसेंजर कार डिवीजन संघर्ष कर रही थी, तब रतन टाटा अपनी कार इकाई बेचने फोर्ड के पास गए थे। उस समय फोर्ड के अधिकारियों ने टाटा का मजाक उड़ाते हुए कहा था कि कार बनाना जब नहीं आता तो इस बिजनेस में क्यों आए।

लगभग एक दशक बाद पासा पलटा। 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी के दौरान जब फोर्ड वित्तीय संकट से जूझ रही थी, तब रतन टाटा ने आगे बढ़कर जगुआर और लैंड रोवर को खरीद लिया। इसके बाद टाटा मोटर्स ने दोनों लग्जरी ब्रांड्स को न केवल घाटे से उभारा, बल्कि उन्हें वैश्विक बाजार में नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। आज जगुआर लैंड रोवर (JLR) टाटा समूह की सफलता की एक अहम मिसाल है।

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