गर्भावस्था में डिलीवरी की सही तारीख (EDD) कैसे तय होती है?
गर्भधारण के बाद हर महिला के मन में सबसे पहला सवाल यही उठता है कि बच्चे का जन्म कब होगा। डॉक्टरी भाषा में इसे Estimated Due Date (EDD) या प्रसव की सम्भावित तिथि कहा जाता है। इसे सही समय पर जानना न केवल डिलीवरी की तैयारी के लिए जरूरी है, बल्कि शिशु के स्वास्थ्य और विकास पर नजर रखने के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण होता है।
प्रसव की संभावित तारीख का अनुमान लगाने का सबसे आसान और प्रचलित तरीका Naegele's Rule पर आधारित है। इसके तहत आपके अंतिम मासिक धर्म के पहले दिन (LMP) में 280 दिन यानी ठीक 40 हफ्ते जोड़े जाते हैं। इसे साधारण भाषा में कहें तो अपने आखिरी पीरियड की तारीख में 9 महीने और 7 दिन जोड़कर डिलीवरी का समय निकाला जाता है।
हालांकि, हर महिला का मासिक धर्म चक्र (Menstrual Cycle) एक जैसा नहीं होता। यदि आपका साइकिल 28 दिनों का है, तो यह गणना काफी सटीक बैठती है। लेकिन अगर पीरियड अनियमित हैं, तो केवल तारीख के भरोसे नहीं रहा जा सकता। ऐसे मामलों में डॉक्टर गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) कराने की सलाह देते हैं, जिससे शिशु के आकार के आधार पर सही EDD का पता चलता है।
ध्यान रखें कि EDD केवल एक अनुमानित समय होता है। केवल 4 से 5 प्रतिशत बच्चे ही सटीक तारीख पर जन्म लेते हैं। ज्यादातर डिलीवरी 37वें से 42वें हफ्ते के बीच कभी भी हो सकती है, जो कि पूरी तरह सामान्य माना जाता है।
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