शिव: सबसे ऊपर का देवता

कई लोग आध्यात्मिक बातों को लेकर सोचते हैं कि परमेश्वर से बड़ा कौन है? इसका जवाब धर्म और संप्रदाय के अनुसार बदल सकता है। लेकिन शैव सम्प्रदाय में इसका स्पष्ट उत्तर है — भगवान शिव स्वयं सर्वोच्च परमात्मा हैं।

शैव परंपरा में शिव को न केवल सृष्टि का संहारक माना जाता है, बल्कि वे सृजन, स्थिति और प्रलय तीनों के भी स्वामी हैं। कहा जाता है कि वे स्वयं में पूर्ण हैं — ज्योतिर्लिंग के रूप में अनादि और अनंत।

ऋषि-मुनि, पुराणों के अनुसार शिव सभी देवताओं के देव हैं। उनकी त्रिशूल में सृष्टि के तीनों तत्व छिपे हैं और डमरू की ध्वनि से ही वेदों का उद्भव हुआ। जब भी धरती पर अधर्म बढ़ा, शिव की अग्नि की ज्वाला ने संतुलन बहाल किया।

शिव के भक्त मानते हैं कि वे न केवल सर्वशक्तिमान हैं, बल्कि सबके हृदय में विराजमान हैं। उनकी सादगी, तपस्या और अनंत दया उन्हें सभी से ऊपर बनाती है।

इसलिए, शैव सिद्धांत में यह स्पष्ट है — पर

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय