पाकिस्तान का चीनी कर्ज: वित्तीय संकट और भारी ब्याज का बोझ
पाकिस्तान इस समय एक गंभीर आर्थिक चुनौती से जूझ रहा है, जिसका सबसे बड़ा कारण देश पर बढ़ता विदेशी कर्ज है। चीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा कर्जदाता बनकर उभरा है। आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान पर चीन का कुल कर्ज लगभग $29 बिलियन डॉलर (करीब 2.4 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच गया है, जो उसके कुल बाहरी कर्ज का 20 प्रतिशत से भी अधिक है।
चीन से मिले इस कर्ज की सबसे बड़ी समस्या इसकी कड़ी शर्तें और ऊंची ब्याज दरें हैं। जहां एशियाई विकास बैंक (ADB), विश्व बैंक और IMF जैसी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएं 3% से भी कम ब्याज दर पर ऋण देती हैं, वहीं चीन की ब्याज दरें बहुत अधिक हैं। वित्तीय रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 2021-22 में पाकिस्तान ने चीन के 4.5 अरब डॉलर के कर्ज पर लगभग 150 मिलियन डॉलर केवल ब्याज के रूप में चुकाए थे।
चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के नाम पर लिए गए इस भारी-भरकम कर्ज ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह चरमरा दिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन का यह महंगा कर्ज देश को एक गहरे 'डेट ट्रैप' (कर्ज के जाल) में धकेल रहा है, जिससे बाहर निकलना अब बेहद कठिन नजर आ रहा है।
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