मुंबई की धड़कन: जानिए कैसे काम करती है बीएमसी
मुंबई जैसे विशाल शहर को सुचारू रूप से चलाना कोई आसान काम नहीं है। सड़कों की मरम्मत से लेकर पानी की आपूर्ति और साफ-सफाई तक, शहर की तमाम बुनियादी सुविधाओं का जिम्मा बीएमसी (बृहन्मुंबई नगर निगम) पर होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एशिया की सबसे अमीर नगर संस्थाओं में शुमार बीएमसी का संचालन वास्तव में कौन और कैसे करता है?
बीएमसी का प्रबंधन मुख्य रूप से प्रशासनिक और राजनीतिक, दो स्तरों पर बंटा होता है। शहर की असली कार्यकारी शक्तियां नगर आयुक्त (Municipal Commissioner) के पास होती हैं, जो भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के एक वरिष्ठ अधिकारी होते हैं। आयुक्त और उनकी टीम शहर की दैनिक व्यवस्था और नीतियों को लागू करने का काम करती है।
दूसरी ओर, जनता का प्रतिनिधित्व करने के लिए हर पांच साल में बीएमसी चुनाव आयोजित किए जाते हैं। इन चुनावों के जरिए नागरिक अपने-अपने इलाकों से नगरसेवकों (Corporators) को चुनते हैं। ये नगरसेवक अपने वार्डों की समस्याओं को सदन में उठाते हैं और नागरिक विकास कार्यों की निगरानी करते हैं।
सदन के प्रमुख के रूप में मेयर (Mayor) का पद होता है, जो आमतौर पर बहुमत हासिल करने वाले दल से चुना जाता है। हालांकि मेयर का पद काफी सम्मानजनक और गरिमामय होता है, लेकिन प्रशासनिक और वित्तीय फैसले लेने का मुख्य अधिकार नगर आयुक्त के पास ही रहता है। इस तरह प्रशासनिक अनुभव और जनप्रतिनिधियों के तालमेल से मुंबई शहर की व्यवस्था चलती है।
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।