कीड़े पानी पर कैसे चलते हैं?

क्या आपने कभी नदी या तालाब की सतह पर दौड़ते हुए कीड़ों को देखा है? ये छोटे-छोटे जीव पानी पर ऐसे चलते हैं, मानो उनका वजन ही न हो। इसका रहस्य है – पानी का पृष्ठीय तनाव.

पानी के अणु एक-दूसरे से इतने मजबूती से जुड़े होते हैं कि उसकी सतह एक तरह की पतली झिल्ली जैसी बन जाती है। इसी को पृष्ठीय तनाव कहते हैं। कुछ कीड़ों, जैसे जलकीट (वॉटर स्ट्राइडर), का शरीर हल्का और उनके पैर खास तरह के होते हैं, जो पानी की सतह को नहीं तोड़ते। इनके पैर पानी पर इतना दबाव नहीं डालते कि वे डूब जाएँ।

पृष्ठीय तनाव की ताकत इतनी होती है कि वह इन कीड़ों के वजन को संभाल लेती है। ऐसा मानो वे पानी की चादर पर चल रहे हों। यही कारण है कि वे न तैरते हैं, न डूबते हैं, बल्कि उसकी सतह पर फिसलते और दौड़ते हैं।

यह प्राकृतिक घटना न सिर्फ विज्ञान के लिए दिलचस्प है, बल्कि यह दिखाती है कि कैसे छोटे जीव प्रकृति के नियमों के साथ इतनी

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