बैट और बल्ले के लिए संस्कृत में शब्द

क्रिकेट जैसे खेल में बैट या बल्ला एक महत्वपूर्ण उपकरण है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि संस्कृत में इसके लिए कई शब्द प्रयुक्त होते थे? प्राचीन काल में भले ही क्रिकेट नहीं होती थी, लेकिन लकड़ी या चमड़े से बनी वस्तुओं के लिए संस्कृत में विशिष्ट शब्द विकसित हो चुके थे।

बैट के लिए संस्कृत में जतुका या जतूका जैसे शब्द मिलते हैं। ये शब्द आकृति या उपयोग के आधार पर बने हो सकते हैं। इसी तरह, अजिनपत्रा भी एक प्रयोग है, जहाँ ‘अजिन’ का अर्थ चमड़ा होता है, जो बल्ले के पकड़ने वाले हिस्से या ढांचे से जुड़ा हो सकता है।

कुछ पांडुलिपियों और शब्दकोशों में चर्म्मचटका या चर्म्मचटी भी उल्लिखित हैं, जो चमड़े से बनी वस्तुओं को दर्शाते हैं। ये शब्द बल्ले के ग्रिप या हैंडल को संदर्भित कर सकते हैं। एक दुर्लभ परंतु रोचक शब्द है भङ्गारी, जो टूटने योग्य या लचीली वस्तु के लिए प्रयुक

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