ब्रीच डिलीवरी: जब शिशु का जन्म उल्टी स्थिति में होता है

गर्भावस्था के आखिरी हफ्तों में, अधिकांश बच्चे जन्म के लिए स्वाभाविक रूप से अपना सिर नीचे की ओर कर लेते हैं। लेकिन कुछ मामलों में, शिशु की स्थिति इसके विपरीत हो जाती है। जब गर्भ में शिशु का सिर ऊपर की तरफ और उसका नितंब (बटक्स) या पैर नीचे की ओर होते हैं, तो इस चिकित्सीय स्थिति को ब्रीच पॉजिशन (Breech Position) कहा जाता है।

इस स्थिति में होने वाले प्रसव को ब्रीच डिलीवरी कहते हैं। सामान्य डिलीवरी में जहाँ बच्चे का सिर सबसे पहले बाहर आता है, वहीं ब्रीच डिलीवरी के दौरान बच्चे का नितंब या पैर सबसे पहले बाहर आते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, लगभग 3 से 4 प्रतिशत गर्भधारण में शिशु ब्रीच स्थिति में ही रह जाते हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे गर्भाशय में एम्नियोटिक द्रव (पानी) का कम या ज्यादा होना, जुड़वां बच्चे होना या गर्भाशय का असामान्य आकार।

ब्रीच डिलीवरी को सामान्य प्रसव की तुलना में थोड़ा जटिल माना जाता है। प्रसव के दौरान बच्चे के शरीर का बाकी हिस्सा तो आसानी से बाहर आ जाता है, लेकिन सिर के फंसने का जोखिम बना रहता है। यही वजह है कि आज के समय में डॉक्टर माँ और बच्चे दोनों की सुरक्षा के लिए सिजेरियन सेक्शन (C-section) यानी ऑपरेशन द्वारा डिलीवरी कराने को अधिक सुरक्षित विकल्प मानते हैं। यदि गर्भावस्था के 36वें या 37वें हफ्ते में बच्चा ब्रीच स्थिति में हो, तो विशेषज्ञ डॉक्टर कुछ विशेष तकनीकों की मदद से पेट के ऊपर से ही बच्चे को घुमाने का प्रयास भी करते हैं। नियमित डॉक्टरी जांच और सही समय पर लिया गया निर्णय इस स्थिति को पूरी तरह सुरक्षित बना सकता है।

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