भारत में ब्रिटिश हुकूमत और भ्रष्टाचार की नींव

भारत पर अंग्रेजों का कब्ज़ा केवल सैन्य ताक़त का नतीजा नहीं था, बल्कि यह एक सोची-समझी नीति और रणनीतिक चालों का परिणाम था। ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में अपनी पैठ जमाने के लिए यहाँ के स्थानीय राजाओं और महाराजाओं की आपसी फूट, लालच और महत्वाकांक्षाओं का भरपूर फ़ायदा उठाया। नवाबों और रियासतों के शासकों को प्रलोभन देकर और उन्हें भ्रष्ट करके धीरे-धीरे सत्ता के समीकरणों को अपने पक्ष में झुका लिया गया।

एक बार सत्ता पर पकड़ मजबूत होते ही अंग्रेजों ने भारत में प्रशासनिक और संस्थागत भ्रष्टाचार को एक हथियार के रूप में बढ़ावा दिया। उन्होंने ऐसी व्यवस्थाएँ बनाईं, जिससे आम जनता और स्थानीय शासक एक-दूसरे पर अविश्वास करने लगे और पूरी तरह ब्रिटिश हुकूमत पर निर्भर हो गए। धन, पद और विशेषाधिकारों का लालच देकर देश के भीतर ही अपने समर्थक तैयार किए गए, जिससे भारतीय समाज अंदर से कमज़ोर होता चला गया।

इस तरह, भ्रष्टाचार और 'बांटो और राज करो' की नीति अंग्रेजों के लिए भारत को लंबे समय तक गुलाम बनाए रखने का सबसे कारगर साधन बन गई। जो देश कभी अपनी समृद्धि और अखंडता के लिए जाना जाता था, वह आंतरिक फूट और भ्रष्ट व्यवस्था के जाल में फंसकर दो सदियों तक गुलामी की ज़ंजीरों में जकड़ा रहा।

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय