भारत का विदेशी कर्ज और मित्र देशों को आर्थिक सहायता

वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। एक तरफ जहां देश अपनी विकास योजनाओं और वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेशी कर्ज लेता है, वहीं दूसरी तरफ अपने पड़ोसी और विकासशील देशों को 'लाइन ऑफ क्रेडिट' (Line of Credit) के जरिए वित्तीय मदद भी देता है।

सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2021-22 में भारत के विदेशी कर्ज में बढ़ोतरी दर्ज की गई। 31 मार्च, 2022 तक भारत का कुल विदेशी कर्ज 620.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। यह मार्च 2021 के अंत में रहे 573.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर के कर्ज से 8.2 प्रतिशत अधिक है। इसमें बहुपक्षीय संस्थाओं का ऋण, वाणिज्यिक उधार और एनआरआई जमा शामिल हैं।

कर्ज लेने के साथ-साथ भारत वैश्विक पटल पर एक प्रमुख मददगार देश भी है। भारत ने श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, मालदीव और कई अफ्रीकी देशों सहित 60 से अधिक देशों को विकास कार्यों के लिए अरबों डॉलर का कर्ज और मदद मुहैया कराई है। यह राशि सड़क, बिजली, रेलवे और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के निर्माण के लिए दी जाती है, जिससे वैश्विक स्तर पर भारत की साख और मजबूत होती है।

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