मनुष्य जन्म: एक दुर्लभ अवसर

मनुष्य जन्म हिन्दू धर्म में अत्यंत पवित्र और दुर्लभ माना गया है। अनिरुद्ध जोशी 'शतायु' के अनुसार, आत्मा 84 लाख योनियों में भ्रमण करने के बाद मनुष्य का जीवन प्राप्त करती है। यह संख्या केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि इस जीवन की दुर्लभता को दर्शाती है।

पशु, पक्षी, जलचर और अन्य जीव-जंतुओं के रूप में जन्म लेने के बाद जब आत्मा मनुष्यता के स्तर तक पहुँचती है, तो उसे धर्म, अध्यात्म और आत्मज्ञान की ओर बढ़ने का सुअवसर मिलता है।

इस जन्म में मनुष्य के पास विवेक, तर्क और नैतिक चुनाव करने की क्षमता होती है, जो अन्य योनियों में सीमित होती है। इसलिए यह कहा जाता है कि मनुष्य जन्म सिर्फ जन्म नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अवसर है

हालाँकि, यह जन्म बार-बार नहीं मिलता। जीवन के प्रति उदासीनता या अध्यात्म से दूरी के कारण आत्मा पुनः चक्र में फंस सकती है। इसलिए धर्मग्रंथों में कहा गया है कि इस अवसर का सदुपयोग करें — अच्छे

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