देवगिरि और महाराष्ट्र का ऐतिहासिक सफर

महाराष्ट्र का इतिहास केवल एक राज्य की सीमा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समय के साथ बदले कई समृद्ध साम्राज्यों और ऐतिहासिक स्थलों की गाथा है। मध्यकालीन भारत में इस क्षेत्र का एक बेहद महत्वपूर्ण केंद्र देवगिरि हुआ करता था। यह ऐतिहासिक स्थान वर्तमान में छत्रपति संभाजीनगर (पूर्व औरंगाबाद) और अहमदनगर के समीप स्थित है।

इतिहास के पन्नों को पलटें तो 14वीं शताब्दी में दिल्ली के सुल्तान मोहम्मद बिन तुगलक ने देवगिरि के सामरिक महत्व को देखते हुए अपनी राजधानी दिल्ली से हटाकर यहाँ स्थानांतरित की थी और इसका नाम बदलकर दौलताबाद रख दिया था। कालक्रम में मध्य भारत की राजनीति में बड़े बदलाव आए और बहमनी सल्तनत के विभाजन के बाद यह पूरा क्षेत्र बहमनी साम्राज्य से निकले अलग-अलग हिस्सों में बंट गया।

आगे चलकर यह क्षेत्र प्रसिद्ध गोलकुंडा सल्तनत के अधीन आ गया। इसके बाद 17वीं सदी के अंत में मुगल सम्राट औरंगजेब ने दक्षिण भारत की ओर रुख किया और यहाँ अपना संक्षिप्त शासन स्थापित किया। प्राचीन काल के दंडकारण्य और देवगिरि से लेकर छत्रपति शिवाजी महाराज के मराठा साम्राज्य तक, इस पूरे क्षेत्र ने भारत के इतिहास को एक नई दिशा दी है।

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