गीता में श्रीकृष्ण के अनुसार मांस भोजन
श्रीकृष्ण ने भगवद्गीता के अध्याय 17, श्लोक 10 में उन भोजनों के बारे में बताया है जो तामसी प्रवृत्ति वाले लोगों को पसंद आते हैं। इस श्लोक में स्पष्ट किया गया है कि जो भोजन तीन घंटे से अधिक पहले पकाया गया हो, जो स्वादहीन, सड़ा-गला हुआ, जूठा या अस्पृश्य चीजों से युक्त हो, वह तामसी व्यक्तियों को आकर्षित करता है।
हालांकि इस श्लोक में सीधे तौर पर “मांस” शब्द नहीं आया, लेकिन तामसी भोजन में मांस भी शामिल माना गया है। आचार्यों के अनुसार, जो लोग क्रोध, अज्ञान और अंधविश्वास में डूबे होते हैं, वे ऐसे भोजन को पसंद करते हैं जो शरीर और मन दोनों को भारी बना देते हैं।
गीता के संदेश के अनुसार, आहार न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक शुद्धता पर भी प्रभाव डालता है। इसलिए सात्विक आहार—जो ताजा, संतुलित और पवित्र भावना से तैयार किया गया हो—को आत्मज्ञान की ओर ले जाने वाला माना गया है।
श्रीक
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