ससुराल क्यों जाती हैं लड़कियाँ?
आज भी बहुत से लोग सोचते हैं कि शादी के बाद लड़की को ही ससुराल जाना चाहिए, लेकिन क्यों? क्या यह नियम सच में इंसाफ का है? एक सवाल उठाया गया कि लड़कियों को ससुराल क्यों जाना पड़ता है, लड़का क्यों नहीं जाता? इसका जवाब कुछ ऐसा दिया गया कि लड़कियों में सहनशीलता ज्यादा होती है, इसलिए वे लड़के का फ़र्ज़ निभा सकती हैं।
लेकिन क्या सच में सहनशीलता केवल लड़कियों की पहचान है? क्या लड़के भावनात्मक तौर पर कमजोर हैं? ऐसा बिल्कुल नहीं है। ये सोच पुराने जमाने की बची हुई धारणा है, जहाँ लड़कियों को घर-गृहस्थी की जिम्मेदारी दी जाती थी, चाहे वह अपना घर हो या ससुराल।
आज के दौर में, जहाँ लड़कियाँ पढ़-लिखकर नौकरियों में आगे बढ़ रही हैं, तो फिर क्यों न लड़के भी ससुराल जाने का फैसला कर सकें? क्यों न दोनों परिवारों के बीच समानता हो? शादी में अब भावनाओं का संतुलन ज्यादा ज़रूरी है, न कि भूमिकाओं का बँटवारा।
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