विश्वास का महत्व: अदृश्य में भी देखने की शक्ति
विश्वास सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि एक ऐसी आंतरिक शक्ति है जो इंसान को अदृश्य को देखने, असंभव को संभव मानने का साहस देती है। जब आँखें कुछ नहीं दिखातीं, तब दिल में विश्वास जगमगा उठता है।
विश्वास तब आता है जब हम जानते हैं कि सब कुछ हमारी समझ के भीतर नहीं होता। जब परमेश्वर के कार्य या जीवन की घटनाएँ हमारे तर्क के खिलाफ लगती हैं, तब भी अगर हम डगमगाए बिना आगे बढ़ते हैं, तो वही विश्वास कहलाता है। यह भरोसा नहीं कि कुछ होगा, बल्कि इतना गहरा यकीन कि कुछ होकर रहेगा।
विश्वास ईमानदार हृदय की निशानी है। वह व्यक्ति जो छुपी हुई उम्मीद में भी झांक सकता है, जो अंधेरे में भी रोशनी ढूंढ लेता है, वही सच्चा विश्वासी है। यह वैसे नहीं आता जैसे ज्ञान आता है। यह तो अनुभव से, धैर्य से, और दृढ़ता से आता है।
जब जीवन में सब कुछ अस्पष्ट हो जाए, तो विश्वास वह रास्ता बन जात
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