वेद और उसका नाम 'श्रुति': जानिए इसका गहरा रहस्य

प्राचीन भारतीय संस्कृति और साहित्य में वेदों का स्थान सर्वोच्च माना गया है। इन्हें ज्ञान का अटूट भंडार कहा जाता है, जो जीवन के हर पहलू का मार्गदर्शन करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वेदों को एक और विशेष नाम से भी जाना जाता है? वेदों का ही दूसरा नाम 'श्रुति' है।

'श्रुति' शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है 'सुना हुआ'। इस नाम के पीछे एक बहुत ही पावन और वैज्ञानिक कारण छिपा है। सनातन परंपरा के अनुसार, जब इस सृष्टि की रचना हुई, तब सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने यह परम ज्ञान अपने ध्यान में लीन ऋषि-मुनियों को सुनाया था। उस समय लेखन कला या पुस्तकों का अस्तित्व नहीं था। इसलिए, ऋषियों ने इस दिव्य ज्ञान को सुनकर आत्मसात किया।

इसके बाद, इस ज्ञान को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए मौखिक परंपरा का सहारा लिया गया। गुरु अपने शिष्यों को मंत्रों का उच्चारण करके सुनाते थे और शिष्य उन्हें सुनकर याद रखते थे। सदियों तक यह ज्ञान इसी तरह सुनकर और बोलकर जीवित रहा।

क्योंकि इस ज्ञान की उत्पत्ति और इसका प्रसार मुख्य रूप से सुनने की प्रक्रिया पर आधारित था, इसीलिए वेदों को श्रुति कहा गया। यह परंपरा दर्शाती है कि हमारे पूर्वज स्मृति और उच्चारण की कला में कितने निपुण थे।

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