<h2>भारत का संविधान: हाथों से लिखी गई एक अनमोल धरोहर</h2> <p>जब भी हमारे देश के लोकतांत्रिक इतिहास की बात होती है, तो सबसे पहला ख्याल इसके महान संविधान का आता है। क्या आप जानते हैं कि हमारा संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान होने के साथ-साथ एक अनूठी कलाकृति भी है? इसे किसी प्रिंटिंग प्रेस में नहीं छापा गया था, बल्कि पूरी तरह से अपने हाथों से लिखा गया था।</p> <p>इस ऐतिहासिक दस्तावेज को तैयार करने वाले मुख्य व्यक्ति <strong>प्रेम बिहारी नारायण रायजादा</strong> थे। उन्होंने बेहद खूबसूरत लिखावट (कैलोग्राफी) में पूरे संविधान को अपने हाथों से लिखा था। जब पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उनसे इसके पारिश्रमिक (फीस) के बारे में पूछा, तो प्रेम बिहारी जी ने एक भी रुपया लेने से मना कर दिया। उन्होंने बस एक ही शर्त रखी कि संविधान के हर पन्ने पर उनके नाम के साथ उनके दादा का नाम भी छापा जाएगा।</p> <p>इसके अलावा, शांति निकेतन के प्रसिद्ध कलाकारों जैसे <strong>बेहरमन सिंह बिहारे</strong> और <strong>नंदलाल बोस</strong> ने इस संविधान के हर पन्ने को सुंदर चित्रों और बॉर्डर से सजाया। आज यह हस्तलिखित संविधान भारतीय संसद की लाइब्रेरी में हीलियम से भरे खास बक्से में सुरक्षित रखा गया है, जो हमारी समृद्ध संस्कृति और स्वतंत्रता की अमूल्य निशानी है।</p>

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