सरसों का तेल रिफाइंड क्यों नहीं होता है?
आज के समय में बाजार में मिलने वाले ज्यादातर तेलों को रिफाइंड कहा जाता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सरसों का तेल इस श्रेणी में क्यों नहीं आता? इसकी मुख्य वजह इसके बनाने का तरीका है।
रिफाइंड तेल असल में कच्चा तेल होता है जिसे कई तरह की केमिकल प्रोसेस से गुजारा जाता है। इसमें पौधों और वनस्पतियों के तेलों को केमिकल्स की मदद से बदला जाता है, ताकि उसका रंग, महक और स्वाद बदला जा सके। इसके विपरीत, सरसों का तेल पूरी तरह से प्राकृतिक तरीके से तैयार किया जाता है।
पारंपरिक रूप से सरसों का तेल प्राप्त करने के लिए केवल सरसों के बीजों को कोल्हू में पेरा (कुचला) जाता है, या फिर बीजों को पानी के साथ पीसकर आसवन (distillation) प्रक्रिया से गुजारा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी तरह के हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।
यही कारण है कि सरसों का तेल अपनी प्राकृतिक शुद्धता, मजबूत महक और गुणों को बनाए रखता है, जबकि रिफाइंड तेल फैक्ट्रियों में कृत्रिम तरीकों से तैयार होता है। प्राकृतिक रूप से मिलने वाला यह तेल स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है।
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